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सुदीप इग्लेसियस मुर्मू (सिम) के प्रयास ने किया ओलचिकी को और भी समृद्ध।

 

- श्याम मुर्मू (सह संस्थापक, संथाल ई-दिसोम डॉट कॉम)

 

संताली भाषा की लिपि ओलचिकी की रचना गुरु गोमके रघुनाथ मुर्मू ने की थी और इसके बाद से ही उनके इस प्रयास ने संताली भाषा और लेखन के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया। लेकिन सुदीप इग्लेसियस मुर्मू (सिम) ने कुछ ऐसा किया है जिसकी जरूरत वर्षों से ओलचिकी लिपि को थी जिससे ये तकनीकी और व्यवहारिक रूप से और भी समृद्ध होगी ।


सुदीप इग्लेसियस मुर्मू (SiM) के प्रयास ने किया ऑल चिकि को और भी समृद्ध।


सिम मूलतः घाटशिला, झारखंड से है और वर्तमान में सांतरागाछी, पश्चिम बंगाल में रहते है ।

 

पेशे से ग्राफ़िक डिज़ाइनर और टाइपोग्राफर सिम ने काफी अनुसन्धान कर उन बारीकियों और समस्याओं को समझा जिससे ओलचिकी लिपि जूझ रही थी, सिम इसके लिए वर्ष 2017 से काम कर रहे थे, उनके अनुसार ओलचिकी लेखन में दो तरह के शैलियां है एक बड़े अक्षर की और दूसरा ऑल उसारा (कर्सिव राइटिंग ) की।


अभी तक केवल बड़े अक्षरों का ही प्रचलन लेखन और प्रकाशन में है, ऑल उसारा का उपयोग तेजी से लिखने में होता है लेकिन बारीक क्षमता होते हुए भी इसका प्रचलन ना के बराबर में है और इसे अभी तक यूनिकोड मानकीकरण प्राप्त नहीं हुआ है। एक तरह से ये अभी तक उपेक्षित है।


सुदीप इग्लेसियस मुर्मू (SiM) के प्रयास ने किया ऑल चिकि को और भी समृद्ध।


इसी समस्या को सुलझाने के लिए सिम ने छोटे अक्षरों की श्रृंखला का नया सिद्धांत डिज़ाइन किया है जिसे उन्होंने ओलचिकी के पहले से उपस्थित फॉण्ट के साथ इंटेग्रेट किया है, अब ओलचिकी को लैटिन की भांति ही एक ही समय में बड़े और छोटे अक्षरों में एक साथ टाइप किया जा सकता है, जो दिखने में तो आकर्षक हैं ही और लिखने में भी काफी सरल और तेज होंगे।  सिम के इस प्रयास से ओलचिकी लिपि को एक नया आयाम मिलेगा।


सिम गुरु गोमके रघुनाथ मुर्मू से काफी प्रभावित है और वो चाहते है उनके इस लेखन सिद्धांत से गुरु गोमके के प्रयास को एक नयी दिशा मिलेगी और उनके  संताली भाषा और लेखन को और भी समृद्ध करने का सपना साकार होगा।उनकी योजना है ओलचिकी लेखन सिद्धांत के इस संस्करण को यूनिकोड द्वारा मानकीकरण दिलाने की ताकि लोग ऑनलाइन  और ऑफलाइन भी दोनों शैलियों में लिख सके।


सिम की राह आसान नही थी, अपनी चुनौतियों के सवाल पर वो बताते हैं कि करैक्टर डिजाइनिंग के दौरान उन्हें कई प्रोजेक्ट पर काम छोड़ना पड़ा ताकि वो इस पर पूरा समय दे पाए जिसके कारण उन्हें आर्थिक संकट के बोझ का भी सामना करना पड़ा लेकिन वो ये उनके राह में बाधा नही बनी लेकिन एक दौर आया जब अपने जुझारूपन के कारण उनकी तबियत बहुत खराब हो गयी और इस दौरान परिवार ने उन्हें बचाने में लाखों खर्च भी किये लेकिन उनका बचना मुश्किल से था  परंतु वो मानते है कि परिवार की कोशिश और अलौकिक शक्ति ने ही उन्हें नया जीवन दिया । इसके बाद सिम नई ऊर्जा के साथ फिर से अपने काम पर लग गए  और अपने लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचाया।


सिम ने प्रेरणा स्वरूप गुरु गोमके के जीवनसफर को आत्मसात किया जिसके लिए वो जंगलो में रात भर विचरण किया करते थे, पशु,पक्षियों और कीटों की आवाज़ के बीच वो ध्यान किया करते थे उनका विश्वास है इसी प्राकृतिक ऊर्जा ने उन्हें कई कठिनाईयों के बीच निरंतर काम करने की प्रेरणा दी, जिसके कारण वो रात दिन भूखे पेट भी इस पर काम कर सके और उन्हें अंततः वो अक्षर प्राप्त हुए जिनकी उन्होंने कल्पना की थीजिनके लिए उन्होंने हजारों डिज़ाइन की खाक छान मारी



सुदीप इग्लेसियस मुर्मू (SiM) के प्रयास ने किया ऑल चिकि को और भी समृद्ध।


अपने काम के बारे में सिम बताते है कि उनके इस काम के लिए उन्होंने विश्व भर की कई लिपियों का गहराई से अध्ययन किया। ओलचिकी के लिए हजारों अक्षरों को डिज़ाइन किया और बारीकी से हर पहलुओं में उनकी तुलना की । कई बार असंतुष्ट होने पर वो अपने कार्य को नई दिशा से शुरू करते और हजारों अक्षरों और कई श्रृंखलाओं के मेल में परिवर्तन के बाद ही वो अब इस नतीजे पर आए है जहां ओलचिकी के बड़े और छोटे अक्षरों की समावेशी लेखन को वास्तविकता और प्रयोग में लाया जा सकता है ।


सिम के इस प्रयास को कई दिग्गजों से भी सराहना मिली है इसके बारे में ओलचिकी फॉण्ट के जनक आर सी हांसदा ने भी उनके इस नए सिद्धांत को सराहा है।


क्योटो यूनिवर्सिटी जापान में भाषाविद निशांत चौकसी ने उनके प्रयास को ओलचिकी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान बताया है। कुड़ुख भाषा की लिपि कुड़ुख बन्ना के जनक वासुदेव खलखो ने भी उनके सिद्धांत को भी वक़्त की मांग बताया है।


बहुमुखी प्रतिभा के धनी सिम की रूचि बचपन से ही टाइपोग्राफी में थी वो तीन साल की उम्र से ही इसे कर रहे थे। इस कौशलता के अलावा सिम कार्टूनिस्ट, संगीतकार, विजुअल, डिज़ाइनर है साथ ही फिल्ममेकिंग और फोटोग्राफी में भी दक्षता रखते हैं और कई प्रोजेक्ट पर भी काम चुके हैं ।


सिम ने कई अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड के लिए लोगो एवं ब्रांड आइडेंटिटी  के लिए डिजाइनिंग का काम किया है व कई अंतरराष्ट्रीय कंटेस्ट को जीता है और वर्तमान में अपनी सिम डिज़ाईनस प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी की शुरुआत की है जिसके जरिये वो ग्राफ़िक डिजाइनिंग प्लेटफार्म सिमभाई डॉट कॉम तैयार कर रहे है जिसमे लोग अपनी मनपसंद डिज़ाइन ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं।


सिम आलोचनाओं का स्वागत करते है और कहते हैं कि आलोचना से ही हम अपने काम में सुधार ला सकते है। सिम का वेबमेल है sim@simbhai.com यदि किसी के पास कोई सुझाव या प्रश्न हो तो वो सीधे इसके जरिये सिम से संपर्क कर सकते हैं ।


सिम 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में अपनी इस सैद्धांतिक कृति को मानवता के लिए भेंट करते हैं।

 

नोट: इस लेख में उपयोग में लायी गयी सामग्री का सर्वाधिकार सम्बंधित व्यक्तियों के पास सुरक्षित है।



टाटा स्टील में अप्रेंटिसशिप की निकली बहाली, इंप्लाई वार्ड और नन इंप्लाई के बच्चे भी कर सकते हैं आवेदन

इस पोस्ट में हम जमशेदपुर और कलिंगनगर के लिए टाटा स्टील ट्रेड अपरेंटिस 2021 भर्ती के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं, इसलिए इस लेख को ध्यान से पढ़ें।


Location: Jamshedpur (TSU) & Kalinganagar (TSK)

 

Tata Steel Trade Apprentice Recruitment 2021 Online Form - Tisco Apprentice

कैसे इस लड़की ने 18 साल की उम्र में इंटर्नशिप से बचत किया हुआ रूपये से शुरुआत की, 8 करोड़ रुपये के बिज़नेस ।


कैसे इस लड़की ने 18 साल की उम्र में इंटर्नशिप से बचत किया हुआ रूपये से शुरुआत की, 8 करोड़ रुपये के बिज़नेस ।



 तनीषा फग्वानी efgstore.in की संस्थापक और सीईओ हैं जो पॉप-कल्चर मर्चेंडाइज का डिजाइन और निर्माण करती हैं।



इसने 18 साल की उम्र में, 2016 में, 70,000 रुपये के साथ शुरुआत की, उसने कॉलेज में दो इंटर्नशिप से बचाया हुआ रुपये और अपनी माँ से कुछ मदद ली। जिससे वह अपनी बिज़नेस शुरुआत की। उसने वार्नर ब्रदर्स, डिज़नी और कार्टून नेटवर्क से भारत में लाइसेंस प्राप्त माल बेचने के लिए लाइसेंस प्राप्त की है।


वह बताती है कि टाइम टर्नर - हैरी पॉटर मर्चेंडाइज की खोज ने उसे शुरू करने के लिए प्रेरित किया। माल की कीमत उसे $ 50 से अधिक शिपिंग थी। एक महंगी खरीदारी जिसने उसे अपने कुम्हार की दुनिया में थोड़ा जादू जोड़ने से रोक दिया। हालांकि, इस बिंदु पर, उन्होंने बाजार में मौजूद अंतर की पहचान की - देश में लाइसेंस प्राप्त माल निर्माण की कमी, जो ऐसी वस्तुओं को प्रशंसकों के लिए सस्ती बना देगी।


साथ ही, ट्विटर पर जेके राउलिंग के एक मौके के जवाब ने उनके फैसले को और पुख्ता कर दिया। ट्विटर पर तनीषा ने राउलिंग से हैग्रिड के संरक्षक के बारे में पूछा, जिस पर लेखक ने उत्तर दिया, "हैग्रिड एक संरक्षक का निर्माण नहीं कर सका। यह बहुत कठिन मंत्र है।" यह ट्वीट पूरे भारत और दुनिया भर में कई जगहों पर ट्रेंड कर रहा था क्योंकि पॉटरहेड्स को हैग्रिड के लिए दुख हुआ।


स्टार्टअप की चुनौतियां तनीषा मुंबई के जय हिंद कॉलेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रही थीं, तभी उन्होंने efgstore.in पर काम शुरू करने का फैसला की । यह नाम हैरी पॉटर की काल्पनिक दुनिया से भी प्रेरित है, क्योंकि उसने हर फ्लेवर बीन्स से नाम लिया है। तनीषा के EFG का मतलब हर फ्लेवर गीक्स है।


"इसका मतलब है कि हमारे पास हर गीक के लिए एक स्वाद (उत्पाद) है। चाहे आप हॉगवर्ट्स से हों या असगार्ड से, हमने आपको कवर किया है। 23 वर्षीय तनीषा कहती है, अपनी मां की मदद से ही कंपनी शुरू करने के लिए उनके पास 1.2 लाख रुपये जमा हुए। उनकी मां भी आज कंपनी में निदेशक और शेयरधारक हैं। वह याद करती है कि उसकी माँ ने कितने आत्मविश्वास से उससे कहा था, "तुम वैसे भी कोशिश करो वरना तुम्हें पछताना पड़ेगा।" उस समय वह 18 वर्ष की थी, कॉलेज की शुरुआत और उसके अंतिम वर्ष के दबाव का प्रबंधन कर रही थी। कुछ विरोधियों ने भी उसे गंभीरता से नहीं लिया और सोचा कि उसका संघर्ष सिर्फ एक अस्थायी हलचल थी।


यहां तक कि दुर्भाग्य और नुकसान की एक लकीर भी उसे रोक नहीं पाई। उसके तहखाने के कार्यालय में तीसरी बार बाढ़ आ गई, और उसकी मदद करने के लिए कोई नहीं होने के कारण, उसने खुद से ही गंदगी को साफ किया और पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया। "मुझे याद है कि मैं बस भाग जाना और हार मान लेना चाहता था। मेरे उत्पादों और महंगी मशीनों को पानी में देखना और उसके बाद हमें जो नुकसान उठाना पड़ा, उसे मानसिक रूप से देखना बहुत कठिन समय था, ”वह घटना के बारे में बताते हुए कहती हैं। आज, बूटस्ट्रैप्ड कंपनी के पास हैरी पॉटर, डीसी कॉमिक्स, फ्रेंड्स, डिज़नी, मार्वल, स्टार वार्स, पावर पफ गर्ल्स, डेक्सटर, जॉनी ब्रावो और अन्य से माल बनाने का लाइसेंस है।




राष्ट्रपति के कार में नंबर प्लेट क्यों नहीं लगे होते हैं?

 राष्ट्रपति के कार में नंबर प्लेट क्यों नहीं लगे होते हैं?

अगर आपके पास कार है तो आपको पता होता है कि उस पर एक रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट होती है, जिसके जरिए ही कार और उसके मालिक की पहचान की जा सकती है। अगर आप बिना रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट की कार चलाएंगे तो पता है आपके साथ क्या हो सकता है? आपका चालान कट सकता है और हो सकता है कि आपकी कार को जब्त भी कर लिया जाए तो आप गलती से भी ऐसा करने की कभी भी कोशिश मत करना, लेकिन भारत में कुछ गाड़ियां ऐसी भी हैं जो बिना नंबर प्लेट (रजिस्ट्रेशन प्लेट) के चलती हैं। आपको ये जानकर हैरानी हो रही होगी और कुछ को तो इस बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन ये बात बिल्कुल सच है।


राष्ट्रपति के कार में नंबर प्लेट क्यों नहीं लगे होते हैं यह बताने से पहले आपको बता दें कि अगर कोई व्यक्ति कोई नई गाड़ी लेता है तो उसे रजिस्ट्रेशन नंबर जारी होने तक एक टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है।


अब बात करते हैं कि राष्ट्रपति के कार में नंबर प्लेट क्यों नहीं लगे होते हैं। क्योंकि भारत में आज भी ब्रिटिश के बनाए हुए कई नियम-कानून माने जा रहे हैं। ब्रिटिश कानून के अनुसार THE KING CAN DO NO WRONG यानी एक राजा कभी गलत नहीं कर सकता है। इसको देखते हुए राष्ट्रपति और अन्य माननीयों के गाड़ियों में रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं लगे होते हैं।


ब्रिटिश कानून को मानते हुए राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति और राज्यपाल सहित तमाम वीवीआइपी के गाड़ी में रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं लगे होते हैं। अब बात किस कार का प्रयोग करते हैं?


देश के राष्ट्रपति के कार में नंबर प्लेट क्यों नहीं होती है?


भारत के राष्ट्रपति जर्मन कंपनी Mercedes Benz की मशहूर लिमोजिन Maybach S600 का प्रयोग करते हैं जिसका अपडेटेड वर्जन खरीदा जाने वाला है जिसकी कीमत 12 से 14 करोड़ हो सकती है जिस अभी जिस गाड़ी का प्रयोग कर रहे हैं उसकी कीमत 10.5 करोड़ रूपये है

जमशेदपुर की इस लड़की ने 1.2 लाख रुपये में बेचे एक दर्जन आम, ऑनलाइन क्लास के लिए खरीदा स्मार्टफोन


जमशेदपुर की इस लड़की ने 1.2 लाख रुपये में बेचे एक दर्जन आम, ऑनलाइन क्लास के लिए खरीदा स्मार्टफोन


तुलसी कुमारी को स्मार्टफोन खरीदने और ऑनलाइन क्लास जारी रखने में मदद करने के लिए मुंबई के एक व्यवसायी ने 1.2 लाख रुपये में एक दर्जन आम खरीदे।


मुंबई के एक 'चाचा' ने जमशेदपुर की एक 11 वर्षीय लड़की को स्मार्टफोन खरीदने और ऑनलाइन क्लास करने के उसके सपनों को पूरा करने में मदद की। तुलसी कुमारी, जो सड़क के किनारे आम बेचती है, सदमे में रह गई जब एक निश्चित अमेया हेटे ने उससे 1,20,000 रुपये के 12 आम खरीदे, प्रत्येक आम के लिए 10,000 रुपये का भुगतान किया। बुधवार को उसके पिता श्रीमल कुमार के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए।


News18 लोकमत डिजिटल ने कुमारी के गरीबी के संघर्ष पर रिपोर्ट दी थी। सभी बाधाओं के खिलाफ उसकी लड़ाई के बारे में जानने के बाद, अमेया हेटे नाम की मुंबई की व्यवसायी ने उससे एक दर्जन आम 1.2 लाख रुपये में खरीदे, ताकि उसे स्मार्टफोन खरीदने और ऑनलाइन कक्षाओं को जारी रखने में मदद मिल सके। उन्होंने कुमारी को 13,000 रुपये का एक मोबाइल फोन और साल भर इंटरनेट रिचार्ज कर दिया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि बालिकाओं की शिक्षा में कोई रुकावट न आए।



झारखंड के एक छोटे से गांव में छोटी बच्ची तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. हालाँकि, यह News18 नेटवर्क की पहल से संभव हुआ। कुमारी हाथ में मोबाइल फोन पाकर खुश हैं। उसने कहा कि वह अब मन लगाकर पढ़ाई करेगी। उनके माता-पिता भी अपनी बेटी पर गर्व महसूस करते हैं।



“तुलसी बहुत ही होशियार और मेहनती छात्रा है। हमें खुशी है अगर वह हमारी मदद से अपनी शिक्षा पूरी करती है। जब भी उसे जरूरत होगी हम उसकी मदद करना जारी रखेंगे," अमेया हेटे ने कहा।



उसके पिता ने लड़की को बहुत कुछ सिखाकर उसे पालने की इच्छा व्यक्त की। कुमारी की माँ को उसका आम बेचना पसंद नहीं था। हालांकि, उनकी मदद से उन्हें उम्मीद है कि उनकी शिक्षा में कोई स्पीड ब्रेकर नहीं होगा।



कोरोनावायरस लॉकडाउन ने कक्षाओं और स्कूली शिक्षा में एक बदलाव का कारण बना दिया है, और अधिकांश संचालन ऑनलाइन स्थानांतरित हो गए हैं, जिससे भारत में डिजिटल विभाजन गहरा गया है। पिछले साल, चेन्नई में एक घरेलू सहायिका के बेटे को एक स्मार्टफोन चोरी करते हुए पकड़ा गया था, लेकिन बाद में पुलिस इंस्पेक्टर ने उसे एक उपहार में दिया ताकि वह अपनी ऑनलाइन कक्षाओं को जारी रख सके।



एक निगम स्कूल के 13 वर्षीय छात्र को ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने की हताशा के बाद यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके माता-पिता कथित तौर पर स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते थे क्योंकि उनके पिता एक बिस्कुट की दुकान पर काम करते थे और इसने स्कूली छात्र को चोरी करने के लिए प्रेरित किया।



पुलिस के अनुसार, लड़का एक ही गरीब पड़ोस के दो लड़कों के साथ आया था, दोनों ने मोबाइल फोन चोरी करने के लिए किशोरी को चारा के रूप में इस्तेमाल किया। स्कूल के घंटों के दौरान उसे इधर-उधर घूमते हुए देखने के बाद, उन्होंने उसे एक स्मार्टफोन के विचार से लुभाने का फैसला किया, ताकि उसे अपनी ऑनलाइन कक्षाओं को याद न करना पड़े।



फिर उनमें से तीन ने तिरुवोट्टियूर में एक ट्रक चालक का मोबाइल फोन चोरी करने में कामयाबी हासिल की और आखिरकार तीनों को पकड़ लिया गया। हालाँकि, कहानी ने सहानुभूति की ओर मोड़ लिया जब पुलिस निरीक्षक एस भुवनेश्वरी ने सुना कि लड़के को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए स्मार्टफोन की आवश्यकता है।



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